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तुम्हारा तोह्फ़ा

तुमने मुझे सबसे दूर करने के चक्कर में मुझे ही अपने आप से दूर कर लिया। सोचा जब मैं अकेली पड़  जाऊंगी  तो तुम्हे छोडके कभी नहीं जाऊंगी। लेकिन तुमने यह नहीं सोचा  जब मुझे पता चलेगा तो मेरी नज़र में तुम कितने गिर जाओगे। यह घिनोना काम तुमने किया और इसकी सज़ा मैं भुगत रही हूँ - दो साल से। सबसे दूर, तुमसे भी दूर। तुम्हे पता था कि मैं खालीपन से कितना डरती हूँ, लेकिन तुम्हे परवाह ही नहीं थी। ऐसे मोड़ पे मुझे छोड़ दिया कि ना मैं आगे बढ़ पा रही हूँ और ना हि वापस आ पा रही हूँ। आज भी उतनी ही अकेली हूँ जितनी दो साल पहले थी। सबसे अलग करके तुम्हें भी कुछ नहीं मिला ना मुझे कुछ। अकेलेपन, खालीपन और सूनापन इतना बढ़ गया है कि चाहके भी मैं वापस नहीं आ सकती हूँ। तुमने मुझे एक चीज़ बहुत भर भर के दी है - आँसू, जिन्हें मैं लाख कोशिश कर भी रोक नहीं पा रही हूँ। तुम्हारा दिया हुआ खालीपन, सूनापन और अकेलेपन का बहुत बहुत शुक्रिया। यह तोह्फ़ा तुम्हारा मरते दम तक याद रखूँगी। एहसान है तुम्हारा मुझपे। याद रहेगा तुम्हारा तोह्फ़ा हमेशा।